कहते हैं जिसने पà¥à¤°à¥‡à¤®à¤šà¤‚द नहीं पढ़ा उसने हिनà¥à¤¦à¥à¤¸à¥à¤¤à¤¾à¤¨ नहीं पढ़ा।पà¥à¤°à¥‡à¤®à¤šà¤‚द ने 14 उपनà¥à¤¯à¤¾à¤¸ व 300 से अधिक कहानियाठलिखीं। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपनी समà¥à¤ªà¥‚रà¥à¤£ कहानियों को 'मानसरोवर' में संजोकर पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ किया है। इनमें से अनेक कहानियाठदेश-à¤à¤° के पाठà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤®à¥‹à¤‚ में समाविषà¥à¤Ÿ हà¥à¤ˆ हैं, कई पर नाटक व फ़िलà¥à¤®à¥‡à¤‚ बनी हैं जब कि कई का à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ व विशà¥à¤µ की अनेक à¤à¤¾à¤·à¤¾à¤“ं में अनà¥à¤µà¤¾à¤¦ हà¥à¤† है।अपने समय और समाज का à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸à¤¿à¤• संदरà¥à¤ तो जैसे पà¥à¤°à¥‡à¤®à¤šà¤‚द की कहानियों को समसà¥à¤¤ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ साहितà¥à¤¯ में अमर बना देता है। उनकी कहानियों में अनेक मनोवैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• बारीक़ियाठà¤à¥€ देखने को मिलती हैं। विषय को विसà¥à¤¤à¤¾à¤° देना व पातà¥à¤°à¥‹à¤‚ के बीच में संवाद उनकी पकड़ को दरà¥à¤¶à¤¾à¤¤à¥‡ हैं।